इंसाफ की डगर पर | Insaaf Kee Dagar Per | Motivational Poem

Insaaf Kee Dagar Per गीत रचनाकार – Shakeel Badayuni

इंसाफ़ की डगर पर (Insaaf Kee Dagar Per) बालीवुड में गीत रचनाकार के रूप में नामचीन, उर्दू के प्रसिद्ध शायर और साहित्यकार शकील बदायूँनी ( जन्म : 03 अगस्त 1916 – निधन: 20 अप्रैल 1970, जन्म स्थान उत्तर प्रदेश का शहर बदायूँ, भारत ) द्वारा रचित भारतीय गीत है। यह स्वतंत्र भारत में नये आशावाद को प्रस्तुत करने वाला देशभक्ति गीत है। यह बच्चों को सम्बोधित करते हुये उन्हें भारतीय नागरीक के रूप में दायित्वों को बताता है। यह बॉलीवुड फ़िल्म गंगा जमुना (1961) का फ़िल्म संगीत है। इसको हेमन्त कुमार ने गाया है।

Poem: इंसाफ की डगर पर

इन्साफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के
ये देश है तुम्हारा, नेता तुम्हीं हो कल के
दुनिया के रंज सहना और कुछ न मुँह से कहना
सच्चाइयों के बल पे आगे को बढ़ते रहना
रख दोगे एक दिन तुम संसार को बदल के
इन्साफ़ की। ..

अपने हों या पराए सबके लिये हो न्याय
देखो कदम तुम्हारा हरगिज़ न डगमगाए
रस्ते बड़े कठिन हैं चलना सम्भल-सम्भल के
इन्साफ़ की। ..

इन्सानियत के सर पर इज़्ज़त का ताज रखना
तन मन भी भेंट देकर भारत की लाज रखना
जीवन नया मिलेगा अंतिम चिता में जल के,
इन्साफ़ की। ..


इंसाफ की डगर पर | Insaaf Kee Dagar Per
इंसाफ की डगर पर | Insaaf Kee Dagar Per

Poem: Insaaf kee Dagar pe

Insaaf kee dagar pe, bachchon dikhao chal ke
Ye desh hai tumhaara,
Neta tumheen ho kal ke
Duniya ke ranj sahana aur kuchh na munh se kahana
Sachchaiyon ke bal pe aage ko badhate rahana
Rakh doge ek din tum sansaar ko badal ke
Insaaf kee. ..

Apane hon ya parae sabake liye ho nyaay
Dekho kadam tumhaara haragiz na dagamagae
Raste bade kathin hain chalana sambhal-sambhal ke insaaf kee. ..

Insaaniyat ke sar par
Izzat ka taaj rakhana
Tan man bhee bhent dekar bhaarat kee laaj rakhana
Jeevan naya milega antim chita mein jal ke,
Insaaf kee. ..

Scroll to Top